हरियाली अमावस्या पर करकापाल में उमड़ा आस्था का सैलाब मां सती के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं ने टेका माथा, मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने चढ़ाया चढ़ावा
12 अगस्त 2026 जगदलपुर हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर जगदलपुर से करीब 3 किलोमीटर दूर करकापाल स्थित वर्षों पुराने मां सती माता मंदिर में हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस बार भी भव्य मेला और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचते रहे। देखते ही देखते मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से भर गया।
करकापाल स्थित मां सती माता का यह प्राचीन मंदिर लंबे समय से क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। बस्तर संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां सती के दरबार में मांगी गई मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार माता के चरणों में चढ़ावा अर्पित करते हैं।
मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाते हैं चढ़ावा
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच मां सती को लेकर गहरी आस्था है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा माता के दरबार में आकर पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार कुछ श्रद्धालु अपनी मन्नत के अनुरूप बकरा, मुर्गा या बत्तख आदि चढ़ावा के रूप में अर्पित करते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार इस तरह की बलि पूजा से जुड़े प्रसाद को मंदिर परिसर के आसपास पुरुष श्रद्धालु ही तैयार कर ग्रहण करते हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही स्थानीय धार्मिक मान्यता का हिस्सा बताई जाती है।
कभी कुसुम के पेड़ के नीचे होती थी पूजा
मंदिर के प्रधान पुजारी अखिलेश स्वर्णकार ने बताया कि मां सती की पूजा-अर्चना का इतिहास कई वर्षों पुराना है। शुरुआती दौर में माता की सेवा और पूजा कुसुम के पेड़ के नीचे की जाती थी। पुजारी के अनुसार उस समय माता की ओर से मंदिर के ऊपर छत बनाने की अनुमति नहीं होने की मान्यता थी, इसलिए खुले स्थान पर ही माता की पूजा होती रही।
कई वर्षों तक इसी तरह पूजा-अर्चना और सेवा का क्रम चलता रहा। बाद में माता सती के आदेश और आशीर्वाद की मान्यता के बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। आज इसी मंदिर में विराजमान मां सती की श्रद्धालु पूरे विश्वास और आस्था के साथ पूजा करते हैं तथा माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हर साल बढ़ती जा रही श्रद्धालुओं की संख्या
हरियाली अमावस्या के अवसर पर आयोजित मेले में इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, दर्शन और चढ़ावे के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां सती के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
करकापाल का मां सती मंदिर जगदलपुर शहर के बेहद करीब होने के कारण आसपास के ग्रामीणों के साथ शहर से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। हरियाली अमावस्या के दिन मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होने के चलते इसकी रौनक देखते ही बनती है।
बस्तर की आस्था और परंपरा का जीवंत केंद्र
करकापाल स्थित मां सती माता का मंदिर केवल पूजा का स्थल ही नहीं, बल्कि बस्तर की पुरानी लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं के बीच हर वर्ष श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है।
हरियाली अमावस्या के दिन मां सती के दरबार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि बस्तर की धरती पर सदियों पुरानी लोक आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।